Gita Press, Gorakhpur

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Book code0011
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LanguageHindi, हिन्दी

नित्यलीलालीनश्रद्धेय (भाईजी) श्रीहनुमानप्रसादजीपोद्दारद्वाराभिन्न-भिन्नरुचि, अधिकार, योग्यतावालेमनुष्योंकोकर्तव्य-कर्मकाबोधतथाभगवान्कीओरगतिकरानेकेउद्देश्यसेलिखेगयेगीता-सम्बन्धीलेखों, विचारों, पत्रोंकादुर्लभसंग्रह।इसमेंगीताकेश्लोकोंकीसंक्षिप्तटीकाकेसाथगीतामेंभक्तियोग, शरणागतिकास्वरूप, निष्कामकर्म, आत्माकीशाश्वतता, गीताऔरवैराग्यआदिअनेकविषयोंपरविशदविवेचनहै।सचित्र, सजिल्द।

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