Gita Press, Gorakhpur

20.00

 

Information
Book code 0268
Pages 176
Author जयदयाल गोयन्दका
Language हिन्दी, Hindi

Out of stock

इस पुस्तक में परम श्रद्धेय ब्रह्मलीन श्रीजयदयाल गोयन्दका द्वारा शास्त्रीय दृष्टि से धर्म युक्त उन्नति, प्राचीन सिद्धान्तों की उपादेयता, वर्तमान पतन तथा उससे बचने के उपाय, परम पुरुषार्थ इत्यादि विषयों का सुन्दर विवेचन है।

Share This

Additional information

Dimensions 13.3 × 20.3 cm

Reviews

There are no reviews yet.

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.