Gita Press, Gorakhpur

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Book code0085
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LanguageHindi

गोस्वामीश्रीतुलसीदासजीमहाराजकेद्वाराप्रणीतश्रीरामचरितमानसहिन्दीसाहित्यकीसर्वोत्कृष्टï रचनाहै।आदर्शराजधर्म, आदर्शगृहस्थ-जीवन, आदर्शपारिवारिकजीवनआदिमानव-धर्मकेसर्वोत्कृष्टï आदर्शोंकायहअनुपमआगारहै।सर्वोच्चभक्ति, ज्ञान, त्याग, वैराग्यतथाभगवान्कीआदर्शमानव-लीलातथागुण, प्रभावकोव्यक्तकरनेवालाऐसाग्रन्थरत्नसंसारकीकिसीभाषामेंमिलनाअसम्भवहै।आशीर्वादात्मकग्रन्थहोनेकेकारणसभीलोगइसकामन्त्रवत्आदरकरतेहैं।इसकाश्रद्धापूर्वकपाठकरनेसेएवंइसकेउपदेशोंकेअनुरूपआचरणकरनेसेमानवमात्रकेकल्याणकेसाथभगवत्प्रेमकीसहजहीप्राप्तिसम्भवहै।इसदिव्यग्रन्थरत्नकीअधिकाधिकप्रचार-प्रसारकीदृष्टिïसेहीगीताप्रेससेइसकेबृहदाकार, ग्रन्थाकार, मझलाआकार, गुटकाआकारऔरअलग-अलगकाण्डकेरूपमेंविभिन्नभाषाओंमेंसटीकएवंमूलअनेकसंस्करणप्रकाशितकियेगयेहैं।श्रीरामचरितमानसकासटीकसंस्करणअबतकप्रकाशितसैकड़ोंटीकाओंमेंपाठ-भेदोंकोदृष्टिïमेंरखकरसर्वाधिकप्रमाणितटीकाकेरूपमेंनिकालागया।यहाँसेप्रकाशितश्रीरामचरितमानसकामूलपाठभीयथाशक्तिसर्वाधिकशुद्धतथाक्षेपकरहितहै।श्रीरामचरितमानसकेसभीसंस्करणोंमेंपाठ-विधिकेसाथनवाह्नï औरमासपारायणकेविश्रामस्थान, गोस्वामीजीकीसंक्षिप्तजीवनी, श्रीरामशलाकाप्रश्नावलीतथाअन्तमेंरामायणजीकीआरतीदीगयीहै।गीताप्रेससेप्रकाशितश्रीरामचरितमानसकेविभिन्नसंस्करणोंकीप्रत्येकघरमेंउपस्थितिहीइसकीलोकप्रियतातथाप्रामाणिकताकासुन्दरपरिचयहै।

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Dimensions10.16 × 13.54 cm

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