Gita Press, Gorakhpur

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जैमिनीकृत महाभारतमें भक्तोंकी गाथा [ सजिल्द] (कोड 1771) पुस्तकाकार—यह ग्रन्थ भगवान् व्यासके प्रिय शिष्य महर्षि जैमिनिके द्वारा प्रणीत है। इसकी कथाएँ अत्यन्त मधुर, रोचक तथा भगवान्के प्रति भक्ति, प्रेमकी वृद्धि करनेवाली हैं। भक्त सुधन्वा, मोरध्वज, ताम्रध्वज, चन्द्रहास आदिकी सरस कथाएँ इसी ग्रन्थमें मिलती हैं। भक्तोंकी माँगपर इसमें सम्पूर्ण आश्वमेधिक पर्वकी कथाओंको केवल हिन्दी भाषामें प्रकाशित किया गया है। मूल्य ९०

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